डॉ. हिमांशु ऐरन बोले—आपदा से पहले सजगता ही सबसे बड़ा बचाव, छात्र बनें समाज की पहली सुरक्षा पंक्ति

देहरादून संवाददाता

राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के तत्वावधान में रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून में एक दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम देहरादून जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का संयोजन एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक प्रदीप महारा द्वारा किया गया। प्रशिक्षण सत्र जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीम ने आयोजित किया, जिसका नेतृत्व मास्टर ट्रेनर राजू शाही ने किया।

कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो डॉ हिमांशु ऐरन ने किया। इस अवसर पर अपने प्रेरक संबोधन में डॉ. ऐरन ने कहा कि “आपदाएँ चेतावनी देकर नहीं आतीं, लेकिन यदि समाज विशेषकर युवा वर्ग प्रशिक्षित और सजग हो, तो जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विश्वविद्यालय का दायित्व केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि ऐसे सक्षम नागरिक तैयार करना है जो आपात परिस्थितियों में नेतृत्व कर सकें।” उन्होंने छात्रों से सामुदायिक स्तर पर आपदा प्रबंधन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का सफल संचालन मिधत असलम ने किया। इस अवसर पर डॉ इमरान ख़ान , डॉ रमन कीमोठी , मनाली रावत , डॉ दीपक एवं डॉ आलोक भी उपस्थित रहे। सभी ने छात्रों को ऐसे क्षमता-वर्धक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 300 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। उन्हें आपातकालीन प्रतिक्रिया, प्राथमिक उपचार, सुरक्षित निकासी तथा आपदा से पूर्व और पश्चात की तैयारियों से संबंधित व्यावहारिक जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का उद्देश्य युवा स्वयंसेवकों को आपदा-तैयारी के प्रति जागरूक करना तथा आपात स्थितियों में जिम्मेदार नागरिक के रूप में उनकी भूमिका को सशक्त बनाना रहा।

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