राम मंदिर में गर्भगृह के बाहर शुरू हुई आरती की नई परम्परा बदल गई है। यहां 51-51 बत्तियों की होने वाली चार-चार आरतियां अब नौ -नौ बत्तियों की आरती में बदल गई है। धुंए से मंदिर में लगे पत्थरों पर कालिक की परतें पड़ने लगी थीं। इसलिए ट्रस्ट ने 51 की जगह अब नौ बत्तियों की आरती का फैसला लिया गया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व से शुरू हुई इस व्यवस्था के लिए मां सरयू की आरती करने वाले चार अतिरिक्त पुजारियों को नियुक्त किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नये महासचिव गोविंद देव गिरि के निर्देश पर शुरू हुई इस आरती के लिए छह पुजारियों को तैनात किया जाना था लेकिन दो अतिरिक्त पुजारियों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो पाने से फिलहाल चार पुजारियों से आरती की शुरुआत कराई गई थी।
उधर इस आरती के आरम्भ से ही अंदरखाने आपत्ति शुरू हो गयी थी। इसके कारण आरती के बंद हो जाने की आशंका गहराने लगी थी। इस बीच ट्रस्टियों ने आपसी सहमति से मध्य का रास्ता तलाश किया और फिर 51-51 बत्तियों के बजाय नौ आरतियों का प्रस्ताव किया गया जिसे मंजूरी दे दी गयी। बताया गया कि 51-51 बत्तियों की बड़ी आरती के कारण उठने वाले धुंए की कालिख की परतें राम मंदिर की छत और दीवारों पर जमा होना शुरू हो गयी जिससे छत एवं दीवारों के साथ स्तम्भों पर उत्कीर्ण कलाकृतियां मलीन पड़ जा रही थी। इसके कारण उनकी सफाई एक बड़ा मुद्दा बन गयी। यही वजह है कि आरतियों की बत्ती की संख्या घटानी पड़ी।
