उज्जैन के खड़े हनुमान जी इन दिनों चर्चा में हैं। सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर हटाने के बाद आठ फुट ऊंची हनुमान प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन तमाम कोशिश फेल हो गई और मूर्ति अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई। श्रद्धालु इसे बजरंग बली के चमत्कार से जोड़ते हैं। इसी तरह का एक प्रसंग पश्चिम उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत में भी है। बड़ौत पंचवटी मंदिर में विराजमान हठीले हनुमान जी को हटाने की कई कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं।

हठीले हनुमान की स्थापना करीब 150 साल पहले बाबा उत्तम दास और संतोष पुरी की प्रेरणा से की गई। यह ढाई फीट की सिंदूरी प्रतिमा है। जिन बाबाओं ने इन्हें स्थापित किया, मंदिर में उनकी भी समाधि भीहै। सात साल पहले मंदिर में इस मूर्ति को हटाकर खड़ी मूर्ति लगाने का निर्णय लिया गया, लेकिन जब इसे हटाने का प्रयास हुआ तो मूर्ति हिली नहीं। कहा जाता है कि इसके बाद लोगों ने इसे हटाने की तैयारी टाल दी। तभी से इनका नाम हठीले हनुमान रखा गया।
बड़ौत के पंचवटी मंदिर में विराजमान हनुमान जी की मूर्ति को अलग-अलग समय पर दूसरे स्थान पर ले जाने या स्थान परिवर्तन की कोशिश की गई, लेकिन हर प्रयास विफल साबित हुआ। तब से श्रद्धालुओं में मान्यता बन गई कि हनुमान जी स्वयं अपना स्थान छोड़ना नहीं चाहते। मूर्ति के स्थान से न हटने के कारण श्रद्धालु आस्था से इन्हें ‘हठीले हनुमान’ कहकर पुकारते हैं। मान्यता है कि जो सच्चे मन से यहां बजरंग बली से मनोकामना मांगते हैं, वो पूरी होती है।
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कार्रवाई के दौरान मूर्ति को स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया। मूर्ति के नहीं हिलने के बाद यह मामला देश भर में चर्चा में आ गया है। बागपत के श्रद्धालुओं का कहना है कि उज्जैन का प्रसंग बड़ौत के पंचवटी मंदिर में विराजमान हठीले हनुमान की याद दिलाता है।
