राजेश चंद्रा ने दिया ‘दैनिक जीवन में ध्यान’ पर व्याख्यान, डॉ. नीलिमा चौहान ने किया स्वागत
देहरादून। रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून के महाप्रजापती गौतमी सुभारती बौद्ध अध्ययन विद्यालय की ओर से ललितादित्य सभागार में ‘दैनिक जीवन में ध्यान’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ध्यान शिक्षक एवं बौद्ध विद्वान श्री राजेश चंद्रा ने विद्या र्थियों को दैनिक जीवन में ध्यान की उपयोगिता, इसके अभ्यास की सरल विधियों तथा मानसिक एवं भावनात्मक संतुलन में इसकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

श्री राजेश चंद्रा ने कहा कि ध्यान को केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे प्रत्येक व्यक्ति के दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। नियमित ध्यान से व्यक्ति को आत्मबल प्राप्त होता है और तनाव को कम करने, एकाग्रता बढ़ाने तथा मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तेज होती जीवनशैली और बढ़ते मानसिक दबाव के बीच ध्यान मन को स्थिर रखने और जीवन में संतुलन बनाए रखने का प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने विद्यार्थियों को ध्यान की व्यावहारिक विधि समझाते हुए बताया कि इसके लिए किसी जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है। शांत वातावरण में सहज होकर बैठना, शरीर को स्थिर रखना और अपनी श्वास पर ध्यान केंद्रित करना ध्यान की सरल शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न ध्यान विधियों के बारे में जानकारी देने के साथ उनका अभ्यास भी कराया।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के जीवन में पढ़ाई, प्रतियोगिता और भविष्य को लेकर अनेक प्रकार का मानसिक दबाव रहता है। ऐसे में नियमित ध्यान उन्हें अपने विचारों के प्रति सजग रहने, एकाग्रता विकसित करने और परिस्थितियों का अधिक संतुलित ढंग से सामना करने में सहायता कर सकता है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में महाप्रजापती गौतमी सुभारती बौद्ध अध्ययन विद्यालय की डीन डॉ. नीलिमा चौहान ने पौधा भेंट कर एवं विभाग के छात्रों द्वारा प्रस्तुत बौद्ध सुत्त से श्री राजेश चंद्रा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अकादमिक शिक्षा के साथ मानसिक शांति, आत्म-अनुशासन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ध्यान का विशेष महत्व रहा है और इसे आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं के साथ जोड़कर विद्यार्थियों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का संचालन सलाहकार डॉ. साव हट सैंडर ने किया। उन्होंने कहा कि ध्यान एवं सजगता का नियमित अभ्यास विद्यार्थियों को स्वयं को बेहतर ढंग से समझने और जीवन की चुनौतियों का धैर्य एवं संतुलन के साथ सामना करने में सहायक हो सकता है।
इस अवसर पर डॉ. संदीप ध्यानी, प्रियंका, अंकुश गौरियन, दीपक, डॉ. भावना सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने ध्यान की प्रक्रिया एवं दैनिक जीवन में इसके प्रयोग से संबंधित विभिन्न प्रश्न भी पूछे, जिनका वक्ता ने विस्तार से उत्तर दिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ध्यान की उपयोगिता से परिचित कराने के साथ उन्हें इसे अपनी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
