बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में जेन-जी पर खुलकर बोले। उनसे जब पूछा गया कि देश का जेन-जी खुद को कॉकरोच की संज्ञा दे रहा है, इस पर आपका क्या कहना है? इसके जवाब में शास्त्री ने कहा कि ये तो वही बता सकते हैं। भारत के संविधान की यही अद्भुत स्वतंत्रता है कि आप कुछ भी कह सकते हो और कुछ भी बन सकते हो। हम तो इस देश के जेन-जी को विवेकानंद बनाना चाहते हैं, अल्बर्ट आइंस्टीन और अब्दुल कलाम जैसा देखना चाहते हैं। देश की बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई जैसा देखना चाहते हैं।

धीरेंद्र शास्त्री ने इंडिया टीवी के कार्यक्रम में यह भी कहा कि यदि उन्हें कॉकरोच पसंद आया तो रख लेना चाहिए। आपको हिट पसंद आए हिट रख लो। उन्हें कॉकरोच नाम पसंद आया तो उन्होंने कॉकरोच पार्टी बना ली। किसी को खुजली हो तो वो हिट रख ले। सीजीपी के बाद डीजीपी रख लो। अपने-अपने काम है। सबके अपने-अपने लफड़े हैं। पर हम इतना कह सकते हैं जेन-जी आज की जनरेशन सिर्फ एक बात से प्रभावित नहीं होती। उसे निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए आपको तर्क रखना पड़ेगा। तभी आज की जेन-जी आपके साथ खड़ी होगी। समय सबका आता जाता है। यह बहुत छोटी बात है। हम किसी पार्टी के बारे में नहीं कह सकते। पार्टियों का अपना काम है। पार्टी कुछ भी हो पर बात देश की हो। हम ये चाहते हैं।

कार्यक्रम में मौजूद युवाओं ने भी धीरेंद्र शास्त्री से सवाल पूछे। एक लड़की ने पूछा कि आजकल के जेन-जी में एंजायटी और ओवरथिंकिंग की बहुत ज्यादा समस्या है। इस पर आप क्या बोलना चाहेंगे कि हम कैसे उसे कम कर सकते हैं? इसका जवाब देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हमको ब्रेन के एल्गोरिदम को समझना होगा। हमारे ब्रेन का एल्गोरिदम एक जैसा चलेगा तो रिपीट टू रिपीट थॉट्स प्रोसेस ब्रेन में चलती रहेगी और हम एंजायटी, डिप्रेशन, स्ट्रेस से जूझने लगेंगे। उसका सर्वोत्तम उपाय यही है कि जैसे ठंडा पानी को गर्म करने के लिए हमको चूल्हे पर रखना होता है। पर ठंडा करने के लिए कुछ नहीं करना पड़ता। चूल्हा बंद करना होता है। ऐसे ही हमको एंजायटी और डिप्रेशन को समझना होगा कि जब ओवरवर्क हमारे ब्रेन को होता है तो वह एंजायटी और डिप्रेशन में बदल जाता है। अगर हमारा ब्रेन वर्क लेस हो जाए, थॉट्स लेस हो जाए और नो माइंड मेडिटेशन करें तो हम एंजायटी से बच सकते हैं।

प्रियंका नाम की एक लड़की ने पूछा कि हमारी आज की जेनेरेशन इंस्टाग्राम की तरफ लोग बहुत खींची जा रही है। इससे दूर कैसे जाया जाए? इस पर शास्त्री ने हंसते हुए कहा कि मोबाइल फोड़ दो। उन्होंने कहा कि ये अपनी भावनाओं पर कंट्रोल करने के ऊपर है। पहले आपको यह समझना होगा आप मन के गुलाम है कि मन आपका गुलाम है। हमारे पास भी मोबाइल है। हमारे पास भी इंस्टाग्राम है, यूट्यूब है, लेकिन वो हमको प्रभावित नहीं करता कि आप चलाओ। हम उसको कहते हैं अब तुझे चलाएंगे। अपने ऊपर है कि कभी हम बिल्कुल नहीं चलाते। कभी 20 मिनट चला लेते हैं, कभी न्यूज भर स्क्रॉल करते हैं। तो हमारी भावनाएं यदि हमारे कंट्रोल में होंगी तो दुनिया की कोई भी इंस्टाग्राम या टिकटॉक आपको प्रभावित नहीं कर पाएगा।

अदिति नाम की एक लड़की ने कहा कि मैं बीजेएमसी की छात्रा हूं। मेरा सवाल यह है कि आपने जैसे अभी-अभी बोला कि स्त्रियों को पहले रखा जाता है। जैसे राधा-कृष्ण, सीता-राम फिर शिव शक्ति में शिव क्यों आगे है और शक्ति क्यों पीछे? इस पर शास्त्री ने कहा कि ऐसा नहीं है। नमः पार्वती पते हर हर महादेव बोलने में पार्वती पहले आता है। शिव शक्ति को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसे अनेक शब्द हैं जिनमें भगवान को आगे और भगवती को पीछे रखा गया। और अनेक शब्द ऐसे हैं जिसमें भगवती आगे और भगवान पीछे रखे गए। दो बातें इसमें समझने जैसी हैं। आपने नमः पार्वती पते हर हर महादेव सुना या पकड़ा अथवा शिव शक्ति पकड़ा वो आपके ऊपर है। हमारे जैसे सोच के व्यक्ति ने नमः पार्वती पते हर हर महादेव पकड़ा है।

एक अन्य लड़की ने पूछा कि आपको जेन-जी गुरु कहा जाता है। सीजेपी प्रोटेस्ट में आपका क्या कोई योगदान था? इस पर शास्त्री ने कहा कि यह हमने आज नया नाम अपना सुना है। उसके लिए थैंक यू। एक साल हम चूक जरूर गए पर आप लोगों ने हम पर कृपा कर दी। दूसरी बात उस प्रोटेस्ट के बारे में। हम उस वक्त किसी आयोजन में थे। हमने अपनी बात रखी कि यह नहीं होना चाहिए और इनकी मांगों को सुना जाना चाहिए। हमने अपनी भूमिका पूरी निभाई जो हम कह सकते हैं। पर हम इसके भी पक्ष में नहीं। हम पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सड़क पर नहीं देखना चाहते। संसद को भी हम सड़क पर नहीं देखना चाहते। हम चाहते हैं देश की सरकार एक ऐसा डोर ओपन करें जिसमें विद्यार्थी अपनी बात डायरेक्ट पहुंचा सके।

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