कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम को केवल दो छंदों तक सीमित करने के राज्य सरकार के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि कहा कि यह फैसला महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसी प्रमुख राष्ट्रीय हस्तियों के निर्णय के अनुरूप है। प्रियांक ने इस मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधा और कहा कि उनकी पार्टी (कांग्रेस) और (राज्य की कांग्रेस) सरकार को उनसे कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है। दरअसल, कर्नाटक सरकार के इस फैसले ने राष्ट्रीय गीत के सभी छंदों को गाने की BJP की मांग वाले विवाद को और बढ़ा दिया है।

भीड़ को संबोधित करते हुए खरगे ने इसके साथ ही कर्नाटक BJP के दो बड़े नेताओं बी.वाई. विजयेंद्र और आर. अशोक को चुनौती दी कि वे “बिना टेलीप्रॉम्प्टर का इस्तेमाल किए या कागज में देखे” वंदे मातरम के सभी छंद गाकर दिखाएं। खरगे ने कहा, “…अगर वे ऐसा कर पाए, तो मैं मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा।” कांग्रेस नेता ने इस विवाद को लेकर BJP और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। खरगे ने इसके साथ ही सवाल किया, “हमारे पूर्वजों ने तय किया था कि वंदे मातरम के केवल दो छंद ही गाए जाएंगे। अब BJP और PM मोदी सभी छंद गाना चाहते हैं। क्या वे जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर से भी बड़े हैं?”

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ”क्या हमें उन लोगों से देशभक्ति का पाठ सीखने की जरूरत है, जिन्होंने अंग्रेजों से 60 रुपये की पेंशन ली थी? देश की आजादी में उनका क्या योगदान है? हमारा फैसला उन लोगों के फैसले के मुताबिक है, जिन्होंने इस देश के लिए लड़ाई लड़ी और अपनी जान दी। हमें भाजपा या आरएसएस से कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है।” कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने आदेश दिया है कि उसके कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरों का ही गायन किया जाए, सिवाय उन कार्यक्रमों के जिनमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल शामिल हों। कर्नाटक में विपक्षी भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए इस फैसले को ”तुष्टीकरण की राजनीति” करार दिया है।

इस बीच, मंगलवार को कर्नाटक हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें कहा गया था कि राज्य सरकार के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएं। वकील गिरीश भारद्वाज द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि यह निर्देश केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशों के विपरीत है। याचिका के अनुसार, गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई, 2026 के एक पत्र के माध्यम से सभी राज्यों को राष्ट्रीय गीत से संबंधित आदेश “सख्ती से पालन” करने के लिए भेजे थे। याचिकाकर्ता ने कहा कि केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार, ‘वंदे मातरम’ का आधिकारिक रूप छह छंदों वाली पूरी रचना है और सामूहिक गायन के दौरान इसी आधिकारिक रूप को गाने की ज़रूरत है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कर्नाटक सरकार का आदेश राष्ट्रीय गीत के उस रूप के खिलाफ है जिसे केंद्र सरकार ने तय किया है। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को रद्द करने की मांग की है।

बता दें कि जनवरी में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि जब राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ और वंदे मातरम दोनों एक साथ बजाए जाएं, तो वंदे मातरम के सभी छह छंद गाए जाने चाहिए। यह निर्देश केंद्र सरकार द्वारा वंदे मातरम के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में जारी किया गया था। हालाँकि, कांग्रेस कार्य समिति ने 19 अगस्त को वंदे मातरम पर अपने 1937 के प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया है, जिसके तहत पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल दो छंद ही गाए जाएंगे।

 

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