ऋषिकेश, 13 अगस्त 2026।
प्रख्यात चिकित्सक, समाजसेवी, शिक्षाविद् एवं मानवता के प्रति समर्पित व्यक्तित्व डॉ. क्षेमेन्द्र गुप्ता की स्मृति में आज ऋषिकेश स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, रेलवे रोड में आयोजित श्रद्धांजलि सभा अत्यंत भावुक वातावरण में संपन्न हुई। शोकसंतप्त ऐरन परिवार की ओर से आयोजित इस सभा में देश एवं प्रदेश की अनेक प्रतिष्ठित विभूतियों, चिकित्सकों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने उपस्थित होकर डॉ. गुप्ता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
इस अवसर पर इंडियन डेंटल एसोसिएशन, नेशनल डेंटल कमीशन के अध्यक्ष, सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ, रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय देहरादून, परमार्थ निकेतन के चिदानंद स्वामी जी सहित अनेक राष्ट्रीय एवं प्रतिष्ठित संस्थानों की ओर से भी शोकसंतप्त परिवार को संवेदना संदेश प्राप्त हुए।
सभा में डॉ. क्षेमेन्द्र गुप्ता के जीवन और उनकी बहुआयामी सेवाओं का स्मरण करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने चिकित्सा को कभी व्यवसाय नहीं माना, बल्कि इसे मानव सेवा और ईश्वर की आराधना का माध्यम समझा। गरीब-अमीर, दिन-रात और किसी भी भेदभाव से परे उन्होंने हजारों लोगों की चिकित्सा सेवा की। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए उनके क्लिनिक के द्वार सदैव खुले रहे।
डॉ. गुप्ता का जन्म 20 अप्रैल 1935 को बिजनौर जनपद के हल्दौर में एक प्रतिष्ठित आर्य विद्वान परिवार में हुआ था। गुरुकुल हरिद्वार से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने वर्ष 1960 में ऋषिकुल आयुर्वेदिक महाविद्यालय से A.M.B.S. (आयुर्वेदाचार्य) की शिक्षा प्राप्त की और अपने क्षेत्र के अग्रणी चिकित्सकों में स्थान बनाया। वर्ष 1998 तक हल्दौर, उसके बाद मेरठ तथा वर्ष 2010 से 2017-18 तक स्वामी राम अस्पताल में उन्होंने चिकित्सा सेवाएं प्रदान कीं।
चिकित्सा के साथ-साथ शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में भी उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा। सी.डी. इंटर कॉलेज, हल्दौर की प्रबंध समिति में विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने शिक्षा के विकास में योगदान दिया। वे चंद्रमणि बाल विकास केंद्र के संस्थापक अध्यक्ष रहे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रसार के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।
समाजसेवा के क्षेत्र में उन्होंने हल्दौर में रोटरी क्लब की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और रोटरी मंडल 3100 के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अशोका होटल, नई दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल रोटरी समिट में तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह द्वारा विशिष्ट रोटेरियन सम्मान से सम्मानित किया गया था।
डॉ. क्षेमेन्द्र गुप्ता अपने पूर्वजों की विरासत आर्य समाज मंदिर से भी गहराई से जुड़े रहे। वे कहा करते थे कि “हल्दौर का कण-कण मेरे हृदय में बसता है।” गांधी नेत्र चिकित्सालय, अलीगढ़ तथा निर्मल आई इंस्टीट्यूट, ऋषिकेश के सहयोग से उन्होंने लगभग दस हजार जरूरतमंद लोगों के नि:शुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन एवं लेंस प्रत्यारोपण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। नेत्रों की रोशनी लौटाने के इस पुनीत कार्य को वे मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम मानते थे।
सभा में डॉ. गुप्ता के बड़े पुत्र डॉ. हिमांशु ऐरन के चिकित्सा, शिक्षा एवं प्रशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान का भी विशेष रूप से स्मरण किया गया। डॉ. हिमांशु ऐरन ने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ से बी.डी.एस. एवं एम.डी.एस. की शिक्षा प्राप्त करने के बाद चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। विभिन्न मेडिकल संस्थानों में प्राचार्य एवं प्रधानाचार्य सहित महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते हुए वे रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय के कुलपति पद तक पहुंचे। वर्तमान में वे नेशनल डेंटल कमीशन के रेटिंग एवं असेसमेंट बोर्ड, नई दिल्ली के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. हिमांशु ऐरन ने अपने पिता के सेवा, शिक्षा और मानवता के मूल्यों को केवल आगे बढ़ाया ही नहीं, बल्कि उन्हें व्यापक स्तर पर नई दिशा दी है। पिता द्वारा शुरू की गई सेवा-परंपरा आज परिवार की अगली पीढ़ी के माध्यम से भी निरंतर आगे बढ़ रही है।
सभा में उनकी पुत्री डॉ. प्रीति विश्नोई द्वारा निर्मल आई इंस्टीट्यूट, ऋषिकेश के माध्यम से जारी नेत्र सेवा तथा परिवार की नई पीढ़ी द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों का भी उल्लेख किया गया।
डॉ. क्षेमेन्द्र गुप्ता की नेत्र दान सेवा को याद करते हुए सभा में उपस्थित लोग अत्यंत भावुक हो उठे। निर्मल आई इंस्टीट्यूट, ऋषिकेश की ओर से कहा गया कि जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में हजारों जरूरतमंद लोगों की आंखों में रोशनी लौटाने के कार्य को सेवा का माध्यम बनाया, उसकी स्मृति को इससे बेहतर श्रद्धांजलि नहीं हो सकती कि समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता और संकल्प को बढ़ाया जाए।
इसी क्रम में उपस्थित लोगों से नेत्रदान का संकल्प लेने की भावपूर्ण अपील की गई। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. गुप्ता की सेवा-परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यदि कोई व्यक्ति मृत्यु के बाद अपने नेत्र किसी जरूरतमंद के जीवन में प्रकाश पहुंचाने के लिए समर्पित करता है, तो यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
डॉ. गुप्ता के जीवन और उनके मानवीय कार्यों का स्मरण करते हुए सभा में उपस्थित अनेक लोग भावुक हो उठे। उनके सेवा-भाव, सरलता और मानवता को याद करते हुए कहा गया कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
सभा के अंत में ऐरन परिवार की ओर से उपस्थित सभी अतिथियों, चिकित्सकों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, संस्थाओं एवं शुभचिंतकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया गया।
डॉ. क्षेमेन्द्र गुप्ता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा गया—
“वह चले गए तो लगा जैसे एक दीप बुझ गया,
मगर उनकी सेवा से हर दिल आज भी रोशन है।
