बिहार में बीजेपी के सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और जनता दल (यूनाइटेड) अगले साल की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में अपनी राजनीतिक संभावनाएं तलाश रहे हैं। हालांकि यूपी में बीजेपी के मौजूदा सहयोगी दलों ने उनके इस कदम का विरोध करने के संकेत दिए हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्रीय मंत्री और LJP (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान गुरुवार को वाराणसी से पार्टी के ‘नव संकल्प महासभा’ अभियान की शुरुआत करने वाले हैं। वहीं JD(U) नेता और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार (जो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे हैं) भी जल्द उत्तर प्रदेश का दौरा कर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर सकते हैं।
बिहार के इन दोनों दलों की यूपी में राजनीतिक विस्तार की कोशिशों पर ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। SBSP एनडीए की सहयोगी है और उसने साफ संकेत दिया है कि वह बिहार के दलों को यूपी में पैर पसारने की कोशिश का विरोध करेगी। SBSP के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर ने कहा, ”जब हमें बिहार में NDA का हिस्सा नहीं बनने दिया गया तो हम बिहार के दलों को उत्तर प्रदेश में आने नहीं देंगे। चाहे वह कोई भी पार्टी हो। अगर ऐसा होता है तो सुहेलदेव पार्टी दूसरे विकल्पों पर विचार करेगी।”
SBSP के लिए यह मामला सिर्फ दूसरी पार्टियों के यूपी में विस्तार का नहीं है बल्कि NDA के सहयोगी दलों के साथ अलग-अलग राज्यों में होने वाले राजनीतिक व्यवहार का भी है।
पार्टी ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में NDA के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। लेकिन उसे गठबंधन में जगह नहीं मिली। इसके बाद SBSP ने बिहार की कुछ सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ा और बहुजन समाज पार्टी (BSP) को समर्थन भी दिया। हालांकि चुनाव में पार्टी कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सकी।
अब अरविंद राजभर की चेतावनी से संकेत मिल रहे हैं कि अगर LJP (रामविलास) और JD(U) उत्तर प्रदेश में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश करते हैं तो SBSP राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति का इस्तेमाल कर NDA में अपनी भूमिका को लेकर नए विकल्पों पर विचार कर सकती है।
बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सहयोगी दलों की अलग-अलग राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को संभालने की है ताकि इसका असर पूरे गठबंधन पर न पड़े।
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दो दिन के दौरे पर गोरखपुर में हैं। इस दौरान उनके क्षेत्र के सहयोगी दलों अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी के विधायकों से मुलाकात करने की संभावना है।
इस बैठक में अपना दल के विधायक विनय वर्मा (शोहरतगढ़) शामिल हो सकते हैं। वहीं निषाद पार्टी के विधायकों में अनिल कुमार त्रिपाठी (मेहदावल), ऋषि त्रिपाठी (नौतनवा), सर्वान कुमार निषाद (चौरी चौरा), विवेकानंद पांडेय (खड्डा), असीम कुमार (तमकुही राज) और केतकी सिंह (बांसडीह) के शामिल होने की उम्मीद है। SBSP के बयान पर प्रतिक्रिया जानने के लिए इंडियन एक्सप्रेस ने बीजेपी से संपर्क किया। लेकिन पार्टी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
SBSP और बीजेपी 2023 से सहयोगी हैं लेकिन दोनों के बीच रिश्ते हमेशा सहज नहीं रहे हैं। पिछले साल लखनऊ में राजभर के घर पर पथराव का मामला सामने आया था। आरोप था कि RSS के छात्र संगठन ABVP के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके घर पर पत्थर फेंके थे। यह विवाद राजभर की ओर से संगठन के सदस्यों को ‘गुंडा’ कहे जाने वाले बयान के बाद हुआ था।
बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश में चिराग पासवान की पार्टी की एंट्री फायदेमंद हो सकती है। माना जा रहा है कि इससे विपक्षी समाजवादी पार्टी (SP) की PDA रणनीति को प्रभावित करने में मदद मिल सकती है। PDA का मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग है। इसके अलावा, बीजेपी की नजर गैर-जाटव दलित वोटों के एक बड़े हिस्से पर भी है।