पश्चिमी यूपी के कई हिस्सों में रविवार को झमाझम बारिश देखने को मिली। मौसम विभाग की मानें तो शुक्रवार तक पूरे प्रदेश के विभिन्न इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की आशंका है। जिससे मौसम ठंडा रहने का अनुमान है। हालांकि इसे लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

मध्य पाकिस्तान और उसके आसपास के क्षेत्र के ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic circulation) से लेकर दक्षिण जम्मू संभाग, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी तक समुद्र तल से 0.9 किमी की ऊंचाई पर एक द्रोणिका बनी हुई है। यूपी मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी यूपी में 12 से 16 अक्टूबर तक जबकि पूर्वी यूपी में 15 और 16 अक्टूबर को कहीं-कहीं बारिश/गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। वहीं, 17 अक्टूबर को प्रदेश में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने के आसार हैं।

लखनऊ और आस-पास आज सुबह आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। हालांकि बाद में आसमान साफ हो जाएगा। अधिकतम तापमान 33 डिग्री जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।

अमरोहा जिले में रविवार को आकाशीय बिजली कड़कने के साथ ही भारी बारिश और जलभराव ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। शुक्रवार के बाद रविवार को हुई मूसलाधार बारिश से धान की पकी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अमरोहा समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, आकाशीय बिजली कड़कने और ओलावृष्टि की संभावना है, जिससे कटाई के मुहाने पर खड़ी फसल के पूरी तरह खराब होने की आशंका से किसानों की बेचैनी बढ़ गई है।

दो दिनों के भीतर मौसम के इस दूसरे बड़े अचानक बदलाव ने अमरोहा के बुनियादी ढांचे और जल निकासी की पोल खोलकर रख दी है। रविवार को दोपहर बाद घने बादलों के साथ शुरू हुई मूसलाधार बारिश से जनपद के कई प्रमुख नगरीय और ग्रामीण इलाकों, सड़कों और गलियों में नालियों का पानी ओवरफ्लो होकर भर गया, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थानीय नागरिकों में नगर निकाय के प्रति गहरा रोष है, क्योंकि हर बारिश में जलभराव की स्थिति बनने के बावजूद अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है। किसानों के लिए यह बारिश दोहरी मार बनकर आई है, क्योंकि 26-27 सितंबर और शुक्रवार को हुई ओलावृष्टि के बाद रविवार की बारिश से खेतों में गिरी धान की फसल का दाना काला पड़ने और गुणवत्ता घटने का गंभीर खतरा पैदा हो गया।

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