भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम करने की साजिश सामने आई है। दावे किए जा रहे थे कि BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए पहुंचे कई राष्ट्र प्रमुख लौटने पर बीमार पड़ गए हैं। अब भारत सरकार ने इस झूठ का पर्दाफाश किया और ऐसे किसी भी मामले से इनकार किया है। राजधानी दिल्ली में 12-13 सितंबर को BRICS सम्मेलन आयोजित हुआ था, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई नेता पहुंचे थे।

सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है, ‘भारत में ब्रिक्स शिख सम्मेलन में शामिल होने के बाद दुनिया के कई नेता कथित तौर पर बीमार पड़ गए हैं।’ अब भारतीय विदेश मंत्रालय ने इससे साफ इनकार कर दिया है। मंत्रालय ने लिखा, ‘फेक अलर्ट। हम गलत भावनाओं से सोशल मीडिया पर की गईं ऐसी पोस्ट्स के खिलाफ आपको सतर्क कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘शी जिनपिंग को इमरजेंसी ट्रीटमेंट के लिए बीजिंग के 301 अस्पताल सेना के हेलीकॉप्टर से ले जाया गया था।’ उन्होंने दावा किया है कि अस्पताल ने पाया कि शी को भयंकर स्कीमिक स्ट्रोक आया था। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि शी को ‘डर था कि भारतीय पक्ष उनकी तबीयत के बारे में जानकारी जुटा लेगा।’ इसके चलते उन्होंने भारतीय अस्पताल में इलाज कराने से मना कर दिया था।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा की तबीयत भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद बिगड़ गई थी। राष्ट्रपति कार्यालय ने लिखा था, ‘राष्ट्रपति रामफोसा ने सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बना ली है।’ आगे लिखा, ‘भारत में ब्रिक्स समिट से सोमवार को लौटे राष्ट्रपति रामफोसा को मेडिकल टीम ने आराम करने और स्वस्थ होने की सलाह दी है।’
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने जहां भी संभव हो, वहां संबंधित मंत्री को उनकी जगह जाने के लिए कहा है। हालांकि, अब तक साफ नहीं हुआ है कि उनकी तबीयत क्यों खराब हुई।
ब्रिक्स में कुल 11 देश शामिल हैं। इनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिनपिंग, पुतिन, समेत कई नेताओं से मुलाकात की थी।
भारतीय सचिव राजेश अग्रवाल ने उम्मीद जताई है कि भारत और चीन के बीच व्यापार के मुद्दे पर बातचीत शुरू हो गई है। उन्होंने कहा था, ‘मेरा मानना है कि इन चर्चाओं को आगे बढ़ाने के लिए बाद में भी बैठकें होंगी। ये चर्चाएं लंबे अंतराल के बाद हो रही हैं। इसलिए धीरे-धीरे दोनों पक्षों को अपने मुद्दों के साथ-साथ दूसरे पक्ष के मुद्दों पर अपना रुख भी सामने रखना होगा, ताकि हम इसे आगे बढ़ा सकें।’
अग्रवाल ने कहा, ‘दोनों पक्षों को व्यापार के क्षेत्र में एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए…साथ ही व्यापार में संरचनात्मक असंतुलन, सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों और दोनों पक्षों के बीच व्यापार में विश्वास कैसे कायम किया जाए, इस पर भी ध्यान देना चाहिए…मेरा मानना है कि दोनों पक्ष इनमें से कई मुद्दों पर एक-दूसरे के रुख को समझने के लिए बातचीत कर रहे हैं।’
