विजय तमिलनाडु की विशिष्ट पहचान और दक्षिणी आवाज को मजबूत करके राष्ट्रीय राजनीति में जगह बना सकते हैं। लेकिन तमिल गौरव पर आधारित राजनीति उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र या पश्चिम बंगाल में आसानी से वोट नहीं दिला पाएगी। उन्हें तमिल नेता और राष्ट्रीय नेता दोनों भूमिकाओं को संतुलित करना होगा।