भाजपा ने पश्चिम बंगाल के लिए 13 उम्मीदवारों की चौथी लिस्ट जारी कर दी है। इस सूची में भाजपा ने सामाजिक समीकरण साधने के प्रयास किए हैं तो वहीं जिताऊ फैक्टर का भी ध्यान रखा है। इसी के तहत कांग्रेस से आए संतोष पाठक को चौरंगी से उतारा गया है। इसके अलावा शांतनु ठाकुर की पत्नी सोमा को मतुआ बहुल सीट बागड़ा से उतार गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सूची में जिताऊ फैक्टर का ध्यान रखा गया है। इसके अलावा सामाजिक और राजनीतिक समीकरण का भी ख्याल रखा गया है। इस लिस्ट के साथ ही भाजपा के कुल उम्मीदवारों की संख्या अब 288 हो गई है और 6 लोगों के नाम ही अब बचे हैं।

कहा जा रहा है कि पार्टी ने मतुआ समुदाय का खास ध्यान रखा है। इसी के तहत सोमा ठाकुर को उत्तर 24 परगना जिले की बागड़ा सीट से उतारा गया है। यह मतुआ समुदाय के लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। सोमा के पति शांतनु ठाकुर सांसद हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। दक्षिण बंगाल के कई जिलों में मतुआ समुदाय का बड़ा असर रहा है। ऐसे में पार्टी चाहती है कि किसी भी तरह से इन लोगों को साध लिया जाए। वहीं चौरंगी सीट पर कांग्रेस के 5 बार से पार्षद संतोष पाठक को चांस मिला है। वह कुछ दिन पहले ही कांग्रेस छोड़कर आए थे। उन्हें कैंडिडेट बनाने का अर्थ है कि भाजपा चाहती है कि बंगाल के शहरी इलाकों में भी पकड़ को मजबूत किया जाए।

प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के नेतृत्व में ही 23 मार्च को संतोष पाठक ने भाजपा जॉइन की थी। उनके अलावा सिताई से आशुतोष बर्मा, नाताबाड़ी से गिरिजा शंकर रॉय को उतारा गया है। इसके अलावा मगराहाट पूर्व से उत्तर कुमार बनिक को मौका मिला है। देबांग्शु पांडा को फालता सीट से उतारा गया है। देबाशीष धर को सोनारपुर उत्तर सीट से चांस मिला है। हावड़ा दक्षिण सीट से श्यामल हाथी और पांचला सीट से रंजन कुमार पॉल को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है। चांदीपुर सीट से पीयूषकांती दास उम्मीदवार बने हैं। दिलचस्प बात यह है कि देबाशीष धर पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। इस तरह भाजपा ने एक मजबूत और चर्चित कैंडिडेट उतारा है।

देबाशीष धर को भाजपा ने लोकसभा चुनाव में भी उतारा था, लेकिन वह चुनाव नहीं लड़ पाए थे। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके नामांकन पत्र खारिज हो गए थे। वह नो ड्यूज सर्टिफिकेट नहीं दे पाए थे। इस बार भाजपा ने उन्हें असेंबली का टिकट दिया है। पहले भी भाजपा की ओर से रिटायर नौकरशाह और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उतारे जाते रहे हैं। यूपी में असीम अरुण या फिर राजेश्वर सिंह जैसे नेता इसकी मिसाल हैं। इसके अलावा भाजपा ने मयनागुड़ी सीट से कैंडिडेट बदल दिया है। यहां 19 मार्च को जारी लिस्ट में कौशिक रॉय का नाम दिया गया था, लेकिन अब उनके स्थान पर दलिम रॉय को उतारा गया है।

दरअसल भाजपा को 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में 18 लोकसभा सीटों पर जीत मिली थी। फिर 2021 के विधानसभा चुनाव में 77 विधायक चुने गए थे। तब से भाजपा को लगता है कि बंगाल की जमीन भी उसके लिए उर्वर हो सकती है और उसने राज्य की सत्ता पाने के लिए हरसंभव प्रयास किए हैं। इस बार भी पार्टी पहले ही कैंडिडेट घोषित करके उतर रही है। अब तक उसने उम्मीदवार तय करने में काफी तेजी दिखाई है, जबकि भाजपा को आखिरी वक्त तक में उम्मीदवार घोषित करने के लिए जाना जाता है।

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