माघ मेला जैसे विशाल धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन की सफलता के मूल में कार्यरत स्वच्छता कर्मियों के योगदान को सार्वजनिक सम्मान देते हुए भागीरथ सहयोग सेवा संस्थान द्वारा रविवार को संगम घाट पर भागीरथ प्रयास (स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान) का 389वाँ चरण गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ निरंतर चल रहा यह अभियान अब केवल स्वच्छता कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदना का सशक्त उदाहरण बन चुका है।


माघ मेला समापन पर श्रम का सार्वजनिक सम्मान
माघ मेला अवधि के दौरान दो माह तक प्रतिकूल परिस्थितियों में अहर्निश सेवा देने वाले स्वच्छता कर्मियों को अंगवस्त्र एवं मिष्ठान भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उस श्रम का सार्वजनिक स्वीकार था, जिसके बल पर करोड़ों श्रद्धालुओं के बीच मेला स्वच्छ और सुव्यवस्थित रह सका।
विशिष्ट अतिथियों की सहभागिता
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक कृष्ण मोहन (प्रांत संयोजक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, काशी प्रांत) रहे।
विशिष्ट अतिथि अनूप शुक्ला (डिप्टी कमांडेंट, BSF) उपस्थित रहे।
इसके साथ विशाल पांडेय (ASP पोस्टल) और अमित पांडेय (विभाग संयोजक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि) की सहभागिता रही।
स्वच्छता को नागरिक कर्तव्य बताया
कृष्ण मोहन ने कहा कि प्रकृति और नदियों की रक्षा अभियानों से अधिक नागरिक आचरण पर निर्भर करती है।
अनूप शुक्ला ने कहा कि स्वच्छता कर्मी माघ मेला के वास्तविक अनुशासन वाहक हैं और समाज का दायित्व है कि उनके श्रम को सम्मान दे।
संस्थापक का स्पष्ट संदेश
संस्थान के संस्थापक एवं राष्ट्रीय सचिव अवनीश सिंह चंदेल ने कहा कि भागीरथ प्रयास का उद्देश्य केवल घाटों की सफाई नहीं, बल्कि समाज में यह चेतना स्थापित करना है कि स्वच्छता सेवा नहीं, संस्कार है। 389 सप्ताह की निरंतरता इस संकल्प की पुष्टि करती है।
संगठनात्मक सहभागिता
कार्यक्रम के सफल संचालन में राष्ट्रीय विधि सलाहकार हरदेव सिंह, प्रदेश अध्यक्ष अनीश मौर्य, भागीरथ सेवक अवनीश पांडे (प्रदेश प्रवक्ता) , रामानंद यादव, रवि सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका रही।

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