रिटायरमेंट तक ₹10 करोड़ का बड़ा फंड तैयार करना कई लोगों का लक्ष्य हो सकता है। लेकिन, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर व्यक्ति को एक जैसी मासिक SIP नहीं करनी होगी। इसकी सबसे बड़ी वजह निवेश शुरू करने की उम्र है। जितनी जल्दी निवेश शुरू किया जाता है, पैसे को बढ़ने के लिए उतना ज्यादा समय मिलता है और कंपाउंडिंग का फायदा भी लंबे समय तक मिलता है। वहीं, अगर निवेश देर से शुरू किया जाए, तो इसी लक्ष्य के लिए हर महीने ज्यादा रकम लगानी पड़ सकती है। आइए जानते हैं कि 12% सालाना रिटर्न के हिसाब 25, 30, 35 और 40 साल की उम्र में कितने रुपये की SIP की जरूरत है?
40 साल की उम्र में ₹10 करोड़ का कॉर्पस
फंड्सइंडिया (FundsIndia) की अगस्त 2026 की वेल्थ कन्वर्सेशन रिपोर्ट (Wealth Conversation Report) के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति 40 साल की उम्र में SIP शुरू करता है और 60 साल तक ₹10 करोड़ का कॉर्पस बनाना चाहता है, तो 12% सालाना रिटर्न की अनुमानित दर पर उसे हर महीने करीब ₹1,00,085 निवेश करना होगा, यानी 20 साल तक लगभग 1 लाख रुपये की मासिक SIP करनी पड़ेगी। यह रकम कई निवेशकों के लिए बड़ी हो सकती है।
25, 30 और 35 साल में ₹10 करोड़ का कॉर्पस
अब अगर यही निवेश कुछ साल पहले शुरू किया जाए तो तस्वीर काफी बदल जाती है। 35 साल की उम्र में शुरुआत करने पर करीब ₹52,697 की मासिक SIP की जरूरत पड़ती है। वहीं, 30 साल की उम्र में शुरुआत करने पर यह रकम घटकर करीब ₹28,329 प्रति माह रह जाती है। सबसे बड़ा अंतर तब दिखाई देता है, जब निवेशक 25 साल की उम्र से शुरुआत करता है। इस स्थिति में ₹10 करोड़ के लक्ष्य के लिए अनुमानित मासिक SIP करीब ₹15,396 बनती है।
40 साल की उम्र में सबसे ज्यादा निवेश
इसका मतलब है कि 40 साल की उम्र में शुरुआत करने वाले निवेशक को 30 साल की उम्र में शुरुआत करने वाले व्यक्ति की तुलना में हर महीने तीन गुने से भी ज्यादा निवेश करना पड़ सकता है। वहीं, 25 साल की उम्र से निवेश शुरू करने की तुलना में 40 साल की उम्र में जरूरी SIP 6 गुने से भी अधिक हो जाती है।
असली फायदा चक्रवृद्धि ब्याज यानी कंपाउंडिंग
ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं है कि शुरुआती निवेशक ज्यादा किस्तें जमा करता है। असली फायदा चक्रवृद्धि ब्याज यानी कंपाउंडिंग का है। जब निवेश को ज्यादा समय मिलता है, तो शुरुआती रकम पर मिलने वाला रिटर्न आगे खुद रिटर्न कमाने लगता है। यही प्रक्रिया लंबे समय में निवेश की रकम को तेजी से बढ़ाने में मदद करती है।
धीरे-धीरे बढ़ाएं SIP की रकम
अगर शुरुआत में बड़ी SIP करना संभव नहीं है, तो निवेशक छोटी रकम से शुरुआत करके हर साल SIP बढ़ा सकता है। इसे SIP स्टेप-अप कहा जाता है। आय बढ़ने के साथ निवेश बढ़ाने से लंबे समय के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ऐसी स्थिति में वास्तविक गणना अलग होगी।
MF निवेश में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है कि ₹10 करोड़ की यह कैलकुलेशन 12% सालाना रिटर्न की धारणा पर आधारित है। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार से जुड़े होते हैं और रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। वास्तविक रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है। इसलिए समय-समय पर SIP और लक्ष्य की समीक्षा करना जरूरी है।
महंगाई को ध्यान में रखकर तय करें कॉर्पस
इसके अलावा महंगाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आज के ₹10 करोड़ और 20 या 30 साल बाद के ₹10 करोड़ की खरीदारी क्षमता समान नहीं होगी। इसलिए अगर लक्ष्य रिटायरमेंट के खर्च को पूरा करना है, तो भविष्य की महंगाई को ध्यान में रखकर कॉर्पस तय करना बेहतर होगा। यह उदाहरण बताता है कि निवेश में समय सबसे बड़ा फायदा हो सकता है। जल्दी शुरुआत करने से हर महीने निवेश का बोझ काफी कम किया जा सकता है।
