तहसीलों में दाखिल खारिज, पैमाइश, वरासत और जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों को लंबे समय तक लटकाने वाले अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निशाने पर आ चुके हैं। एक हफ्ते में दस तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को निलंबित करने के साथ ही 13 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अब सीएम योगी के रडार पर सात उपजिलाधिकारी (एसडीएम) आ गए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर राजस्व परिषद ने आरसीसीएमएस (राजस्व कोर्ट कंप्यूटर मैनेजमेंट सिस्टम) के आंकड़ों के आधार पर खराब प्रदर्शन करने वाले अफसरोंको चिह्नित किया है। इनमें लखनऊ की सरोजनीनगर और सदर तहसील के एसडीएम भी शामिल हैं। चिह्नित अफसरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब संतोषजनक न मिलने पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। सीएम योगी ने पिछले दिनों राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण और खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को चिह्नित करने के निर्देश दिए थे।
मऊ स्थित मधुबन तहसील के एसडीएम (न्यायिक) ने 276 में से 55, प्रतापगढ़ में कुंडा के एसडीएम (न्यायिक) ने 297 में से 80 और रानीगंज के एसडीएम (न्यायिक) ने 418 में से 133 वाद निस्तारित किए। रानीगंज के ही एसडीएम ने 558 में से 183 व कुंडा की एसडीएम ने 1,247 में से 511 मामले निपटाए। राजस्व परिषद के आयुक्त और सचिव ने संबंधित जिलाधिकारियों से चिह्नित अधिकारियों का लिखित स्पष्टीकरण लेकर उपलब्ध कराने को कहा है। पूरी रिपोर्ट 23 सितम्बर तक मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी जानी है।
सीएम योगी की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राजस्व मामलों में लापरवाही और उदासीनता पर कड़ी कार्रवाई पिछले एक हफ्ते में हुई है। दस तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को निलंबित किया गया और 13 को नोटिस जारी की गई है। इनमें पांच तहसीलदारों को मंगलवार को ही निलंबित किया गया है। निलंबित किए गए अधिकारियों में अमित यादव तहसीलदार संडीला हरदोई, कृष्ण कुमार मिश्रा तहसीलदार देवरिया, सौरभ कुमार तहसीलदार जौनपुर, रंजन वर्मा तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या व सम्प्रति तहसीलदार गाजीपुर और अलख शुक्ला तहसीलदार जनपद प्रतापगढ़ शामिल हैं।
इससे पहले एक सितंबर 2026 को भी चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया गया था। यह कार्रवाई 29 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री द्वारा राजस्व अदालतों में लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद दिए गए निर्देशों के क्रम में की जा रही है। समीक्षा में राजस्व वादों का निर्धारित समय में निस्तारण सुनिश्चित करने और लापरवाही पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
