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तबादलों पर बोले कमलनाथ- भाजपा का बिल्ला लेकर चलेंगे तो क्या पुरस्कार मिलेगा

2019-03-07 00:00:00

 

लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मध्य प्रदेश की जनता को 70 दिनों का रिपोर्ट कार्ड सौंपा। इसमें किसानों को दिया गया कर्ज माफी का वचन सबसे अहम है। सरकार ने अपने रिपोर्ट कार्ड में इसे सबसे ऊपर रखा है।

सीएम कमलनाथ ने बताया कि, "हमें 25 दिसंबर को भाजपा ने ऐसा राज्य सौंपा था। जो किसानों की आत्महत्या में नंबर वन था। जो महिला अपराध के मामले में नंबर वन था। ऐसे राज्य को हमने पटरी पर लाने का काम किया है। उन्होंने बताया कि 25 लाख किसानों का 10 हजार करोड़ का कर्जा अब तक माफ हो चुका है। हमने ये काम तब किया, जब प्रदेश का खजाना खाली था।" व्यवस्था में परिवर्तन के लिए हमने काउंसिल ऑफ गुड गर्वेंनस बनाई है।मुख्यमंत्री कमलनाथ के मुताबिक जय किसान ऋण माफी योजना के तहत 55 लाख किसानों का दो लाख रुपए का कर्जा माफ किया गया है। कर्ज माफी की रकम का आंकड़ा 50 हजार करोड़ के पार है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि हमने अपनी क्षेत्र दिन की सरकार का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत कर दिया है उम्मीद करते हैं भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश में रही अपने 15 साल की सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी 5 साल की केंद्र सरकार का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखेंगे।

 

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मुख्यमंत्री 22 अक्टूबर को अमेरिका जाएंगे

2017-10-11 10:47:00

 

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 23 अक्टूबर को वाशिंगटन डीसी अमेरिका पहुंचेंगे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार चौहान को पं. दीनदयाल उपाध्याय फोरम के शुभारंभ सत्र में मुख्य वक्ता के बतौर संबोधन के लिए आमंत्रित किया गया है। वे 22 अक्टूबर को अमेरिका के लिए रवाना होंगे और 27 अक्टूबर को स्वदेश वापस आएंगे। 

भारतीय दूतावास के सहयोग से फाउंडेशन फॉर इंडिया एण्ड इंडिया डायसपोरा स्ट्डीज यूएस द्वारा पं. दीनदयाल उपाध्याय फोरम का शुभारंभ पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 100वीं जन्म-शताब्दी के अवसर पर किया जा रहा है। इस फोरम में भारत के मूर्धन्य विद्वान और अमेरिका के भारतीय मूल के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसमें नीति निर्माता, विचारक, अकादमिक विशेषज्ञ और उद्योगपति भाग लेंगे। इस फोरम में राजनैतिक अस्थिरता, आतंकवाद, आर्थिक समानता, बेरोजगारी, जलवायु परिवर्तन और गरीबी जैसी चुनौतियों पर विचार-विमर्श होगा। 

 

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शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए करें हरसंभव उपाय: शिवराज

2017-06-12 10:13:00

 

मध्यप्रदेश के शासकीय विद्यालयों में भौतिक अधोसंरचना को मजबूत बनाने और अकादमिक विकास के लिए वस्तु रूप में सहायता देने के लिए सामुदायिक सहभागिता से विद्यालय उपहार योजना शुरू की जायेगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस आशय की जानकारी ‘स्कूल चलें हम अभियान’ की समीक्षा बैठक में दी। बैठक में सभी शालाओं को अपनी आवश्यकताओं को चिन्हित करने को कहा गया। बताया गया कि योजना की नवीन स्वरूप में लांचिंग और अच्छी शालाओं को प्राथमिकता देने के लिए प्रणाम पाठशाला कार्यक्रम शुरू होगा। पहली कक्षा में प्रवेश के लिए घर-घर सर्वे होगा।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए हरसंभव उपाय अपनाने के निर्देश दिये। बैठक में बताया गया कि ‘मिल बाँचें मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम में पोर्टल पर पंजीयन 15 जून से शुरू हो जाएगा। सभी प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में नवीन शाला प्रबंधन समितियों का गठन किया गया है। शिक्षकों की नियमित उपस्थिति के लिए शिक्षा मित्र मोबाइल एप का उपयोग किया जाएगा। शाला जाने योग्य अन्य समूह के बच्चों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी।

 

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कागज की पटरियों पर एक दशक से दौड़ रही मेट्रो

2016-12-17 11:05:00

 

मध्य प्रदेश के हाल ‘नौ साल चढ़े अढ़ाई कोस’ वाले हैं. यहां सबसे पहले 2007 में तत्कालीन नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर ने भोपाल-इंदौर में मेट्रो चलाने की घोषणा की थी. इसके लिए आनन-फानन में पहले दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराई गई. लेकिन यह डीपीआर रद्द कर दी गई. अफसरों ने तर्क दिया कि इसमें मेट्रो चलाने के लिए बताया गया खर्च बहुत ज्यादा है. इसके बाद 2012 में फिर नई डीपीआर बनवाने के लिए वैश्विक निविदाएं (ग्लोबल टेंडर) बुलाई गईं. इसके जरिए जर्मनी की कंपनी एलआरटीसी और प्रदेश की एजेंसी रोहित एसोसिएट्स को डीपीआर बनाने का जिम्मा दिया गया. फरवरी 2014 में दूसरी डीपीआर को मंजूरी दे दी गई. इसके हिसाब से जैसा कि नगरीय प्रशासन आयुक्त विवेक अग्रवाल ने एक अखबार को बताया है, ‘भोपाल में 95.03 किलोमीटर ट्रैक पर मेट्रो चलाने की योजना है. इस पर करीब 22,504.25 करोड़ रुपए की लागत आएगी. जबकि इंदौर में 104 किलोमीटर का ट्रैक होगा, जिस पर मेट्रो रेल चलाने में 26,762.21 करोड़ रुपए का खर्च आएगा.’यानी भोपाल और इंदौर की मेट्रो परियोजनाओं की कुल लागत करीब 49,266.46 करोड़ रुपए है. यही रकम जुटाना राज्य सरकार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है क्योंकि सरकारी खजाना तो तंगहाल है. यही वजह थी कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सितंबर 2015 में जब जापान गए तो उन्होंने जाइका (जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन) को दोनों मेट्रो परियोजनाओं के लिए कर्ज देने पर राजी कर लिया. तय हुआ कि 60 फीसदी रकम बतौर कर्ज जाइका से मिलेगी. बाकी 20 फीसद राज्य और इतना ही हिस्सा केंद्र देगा. लेकिन विवेक अग्रवाल (मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन - एमपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक) और उनकी टीम ने सरकार की नजर में नंबर बढ़ाने के लिए इस प्रस्ताव में भी छेड़छाड़ कर डाली. उन्होंने दोनों परियोजनाओं के पहले चरण के लिए जो पीपीआर (प्राथमिक परियोजना रिपोर्ट) तैयार की, उसमें राज्य का 20 फीसदी हिस्सा भी जाइका से मिल रहे कर्ज में जोड़ दिया. लेकिन उनकी होशियारी ने जायका बिगाड़ दिया.एक मार्च 2016 में तैयार की गई पीपीआर के मुताबिक, भोपाल मेट्रो के पहले चरण पर 6,992.92 करोड़ रुपए खर्च होने हैं. इसमें जाइका से 5,570.34 करोड़ रुपए कर्ज के रूप में और बाकी 1,392.58 करोड़ रुपए भारत सरकार से मदद मिलने का उल्लेख है. इसी तरह इंदौर मेट्रो के पहले चरण में 7,522.63 करोड़ रुपए की लागत आने का जिक्र है. इसमें 6018.104 करोड़ रुपए जाइका से कर्ज और 1,504.526 करोड़ रुपए केंद्र से मदद लिए जाने का उल्लेख है. यह पीपीआर जाइका के पास पहुंचते ही उसने कर्ज देने में उदासीनता दिखानी शुरू कर दी. यहां तक कि दोनों परियोजनाओं के लिए उसकी प्रतिक्रिया ही ठंडी पड़ गई. जबकि उसकी टीम पिछले साल ही भोपाल और इंदौर का दौरा करने के बाद इन परियोजनाओं को पहले मंजूरी दे चुकी थी. जाइका बिगड़ा तो सरकार ने एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और यूरोपियन बैंक का दरवाजा खटखटाया. लेकिन एडीबी ने शर्त रख दी कि पहले जाइका से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लाइए. उसमें साफ जिक्र होना चाहिए कि दोनों परियोजनाओं को कर्ज देने का प्रस्ताव वहां रद्द हो चुका है.

 

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