पुस्तक-जगत

समीक्षा : सावधान! अब पुलिस मंच पर भी है

2016-05-06 17:13:00

 

 

समीक्षक - शशि पाण्डेय

‘सावधान! पुलिस मंच पर है’  यह सुनकर पाठकगण डरें नहीं, क्योंकि यह मात्र एक पुस्तक का नाम है,  जो कि व्यंग्य कविताओं का संग्रह है और इसके रचनाकार हैं युवा कवि और लेखक सुमित प्रताप सिंह।

 

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कुछ जिद, कुछ ख्वाहिश

2016-04-05 19:44:00

 

रचनाकार अगर एक्टिविस्ट भी हो तो उसकी रचनाओं की धार अलग नजर आती है. गीता गैरोला के कविता संग्रह नूपीलान की मायरा पायबी (स्त्री युद्ध की जलती मशालें) की कविताएं इस बात का सटीक उदाहरण हैं. इरोम शर्मिला के साथ-साथ देश

 

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बेबाक ‘उग्र’ का रचना संसार

2016-04-05 19:43:00

 

हिंदी साहित्य में रुचि रखने वाला शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ से न परिचित हो. उनकी आत्मकथा ‘अपनी खबर’ को भला कौन भूल सकता है! वह एक अनूठी आत्मकथा है जहां ‘उग्र’ पूरी अलमस्त फक

 

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उनका नरक, इनका स्वर्ग

2016-04-05 19:42:00

 

यह महज संयोग है कि एक तरफ बच्चों को बंधुआ मजदूरी और शोषण से बचाने के लिए एनजीओ चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी को शांति का नोबेल पुरस्कार मिलता है, तो वहीं दूसरी तरफ हिंदी में एनजीओ की भीतरी दुनिय

 

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